निरुपमा खरे को "मन बंजारा" के लिए श्रीमती सुशीला जिनेश स्मृति पुरस्कार



हिंदी लेखिका संघ के 30वें वार्षिक कृति पुरस्कार एवं सम्मान समारोह का गरिमामय आयोजन 

भोपाल। [समीक्षा एक्सप्रेस]। हिंदी साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रख्यात साहित्यकार निरुपमा खरे को उनके काव्य संग्रह "मन बंजारा" के लिए श्रीमती सुशीला जिनेश स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें हिंदी लेखिका संघ के 30वें वार्षिक कृति पुरस्कार एवं सम्मान समारोह में प्रदान किया गया।
यह भव्य समारोह मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित किया गया, जिसमें देशभर से प्रतिष्ठित साहित्यकार, शिक्षाविद और विद्वान शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता निर्मला भूरिया, मंत्री, महिला एवं बाल विकास, मध्यप्रदेश शासन ने की। मुख्य अतिथि के रूप में संतोष चौबे, कुलाधिपति, रविंद्र नाथ टैगोर विश्वविद्यालय एवं निदेशक, विश्व रंग उपस्थित रहे। इसके अलावा, डॉ. राजेश श्रीवास्तव, निदेशक, रामायण शोध केंद्र, विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे, जबकि डॉ. आरती दुबे, शिक्षाविद एवं वरिष्ठ साहित्यकार, सारस्वत अतिथि के रूप में शामिल हुईं।
इस कार्यक्रम का आयोजन हिंदी लेखिका संघ की प्रांत अध्यक्ष कुमकुम गुप्ता के मार्गदर्शन में किया गया। संघ की कार्यकारिणी टीम के सहयोग से यह समारोह बेहद गरिमामय और सफल रहा।

साहित्यकारों का हुआ सम्मान 

इस अवसर पर देशभर की अनेक लेखिकाओं को विभिन्न विधाओं में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। कविता, उपन्यास, कहानी, निबंध, संस्मरण और आलोचना सहित विभिन्न साहित्यिक विधाओं में रचनात्मक कार्य करने वाली लेखिकाओं को पुरस्कृत किया गया। पुरस्कार प्राप्त करने के बाद निरुपमा खरे ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा, यूं तो हम स्वांतः सुखाय लिखते हैं, पर जब इस कलम को प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था द्वारा सराहा जाता है, तो उस खुशी की कोई सीमा नहीं होती। यह पुरस्कार मेरे लिए न केवल सम्मान की बात है, बल्कि मेरी लेखनी को और अधिक समर्पण और सृजनशीलता के साथ आगे बढ़ाने की प्रेरणा भी देता है।

साहित्य प्रेमियों की उल्लेखनीय उपस्थिति 

इस कार्यक्रम में साहित्य प्रेमियों, विद्वानों, शिक्षाविदों और लेखिकाओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। इस अवसर पर साहित्य और समाज के आपसी संबंधों पर भी विचार-विमर्श हुआ। समारोह का समापन हिंदी साहित्य के समृद्ध भविष्य की आशा और लेखिकाओं को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ हुआ। यह पुरस्कार न केवल निरुपमा खरे की साहित्यिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है, बल्कि यह साहित्य में उनकी सृजनशीलता और योगदान का भी प्रमाण है।

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