विराट कवि सम्मेलन में ओजस्वी वाणी से राष्ट्र भक्ति जगाएंगी अनामिका अंबर



लक्ष्य चंडी महायज्ञ का मिला आमंत्रण, वैराग्यानंद गिरी महाराज के प्रयासों से सनातन धर्म का जागरण जारी

भोपाल । मध्यप्रदेश के ग्वालियर में 17 अप्रैल को शाम 7:30 से 10 बजे तक आयोजित होने वाले विशाल, विराट कवि सम्मेलन में सुप्रसिद्ध विश्व कवयित्री एवं गायिका अनामिका अंबर अपनी ओजस्वी वाणी से भारतवासियों को राष्ट्रभक्ति और सनातन धर्म के प्रति प्रेरित करेंगी। इस अवसर पर उन्हें 1 लाख 8 देवी के लक्ष्य चंडी महायज्ञ के लिए सम्मानपूर्वक श्रीफल भेंट कर आमंत्रित किया गया।
यह आयोजन आचार्य श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर स्वामी वैराग्यानंद गिरी महाराज पंचायती श्रीनिरंजनी अखाड़ा के मार्गदर्शन में हो रहा है, जिनका सतत प्रयास रहा है कि भारत में सनातन संस्कृति और धर्म का प्रचार-प्रसार हो और राष्ट्र उत्थान के लिए आध्यात्मिक चेतना जागृत की जाए। उन्होंने कई वर्षों से देश-विदेश में भारतीय संस्कृति को पुनर्जीवित करने के लिए अनेक प्रयास किए हैं, और यह कवि सम्मेलन भी उसी श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
बुधवार को अनामिका अंबर के मेरठ स्थित निवास पर आचार्य श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर स्वामी वैराग्यानंद गिरी महाराज पंचायती श्रीनिरंजनी अखाड़ा, महामंडलेश्वर आनंद गिरि महाराज, भागवत यजमान कपिल कुमार (दुबई), महायज्ञ संयोजक मुकेश अग्रवाल, कलश यजमान राहुल गर्ग दुबई, मनीषा और नेहा सिरोही विशेष रूप से पहुंचे और उन्हें श्रीफल भेंट कर महायज्ञ में आमंत्रित किया। 

अनामिका अंबर का राष्ट्रप्रेम और संकल्प 

इस दौरान अनामिका अम्बर ने कहा, कि जब राष्ट्र के हित में संन्यासी और संत बोलने लग जाएं, तो उस राष्ट्र का उत्थान निश्चित होता है। राष्ट्र कवयित्री अनामिका अंबर ने इस सम्मान को स्वीकार करते हुए कहा कि...
नीति, नियम और नैतिकता का मर्म सियासत मय होता,
राम सरीखा राजा हो तो धर्म सियासत मय होता।
उन्होंने आगे कहा कि सनातन धर्म की पताका हमेशा लहराती रहे, यही उनका संकल्प है। उन्होंने यह भी कहा कि जब राष्ट्र और धर्म के उत्थान के लिए संत और संन्यासी आगे आते हैं, तो वह देश अवश्य ही समृद्ध और शक्तिशाली बनता है। इस अवसर पर अनामिका अंबर ने अपनी ओजस्वी कविता के माध्यम से सनातन धर्म की अमरता पर बल देते हुए कहा—
"परम सत्ता से संचालित ये शासन मिट नहीं सकता,
अमरता दे मनुजता को यह दर्शन मिट नहीं सकता।
न जाने मिट गए कितने मिटाने का लिए सपना,
अमर है जो युगों से, वो सनातन मिट नहीं सकता।

भारत अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर को पुनः स्थापित करे : वैराग्यानंद गिरी महाराज

आचार्य श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर स्वामी वैराग्यानंद गिरी महाराज पंचायती श्रीनिरंजनी अखाड़ा ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि भारत अपनी प्राचीन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर को पुनः स्थापित करे। उन्होंने कहा, भारत की शक्ति इसकी संस्कृति में है, और यह कवि सम्मेलन उसी शक्ति को जागृत करने का एक सशक्त माध्यम बनेगा। आचार्य वैराग्यानंद गिरी महाराज पिछले कई वर्षों से सनातन धर्म के जागरण और राष्ट्र निर्माण के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने देशभर में कई धार्मिक और सांस्कृतिक अनुष्ठानों का आयोजन कराया है, जिनका मुख्य उद्देश्य भारतवासियों को अपनी जड़ों से जोड़ना और आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर करना है। उन्होंने कई महायज्ञों, धर्म-सम्मेलनों और कवि-सम्मेलनों का नेतृत्व किया है, जिनमें सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति की महत्ता को उजागर किया गया। इस कवि सम्मेलन को भी उन्होंने राष्ट्र और धर्म के पुनरुत्थान का माध्यम बताया है।

भारत की आध्यात्मिक चेतना को मिलेगी नई दिशा 

यह विराट कवि सम्मेलन केवल एक साहित्यिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक जागरण और राष्ट्रभक्ति के उत्थान का एक महत्वपूर्ण अवसर है। इस आयोजन में देशभर के प्रतिष्ठित कवि और संतगण अपनी वाणी से धर्म और राष्ट्र के प्रति जागरूकता बढ़ाएंगे।आचार्य वैराग्यानंद गिरी महाराज, महामंडलेश्वर आनंद गिरि महाराज और अन्य संतों के नेतृत्व में यह कार्यक्रम भारत की आध्यात्मिक चेतना को एक नई दिशा प्रदान करेगा और सनातन धर्म की महत्ता को जन-जन तक पहुंचाएगा।

Comments