यूएसए और ताइवान के विशेषज्ञों सहित देश-विदेश के शोधकर्ताओं ने साझा किए नवाचार और चुनौतियां
खरगोन | फार्मेसी अनुसंधान और क्लीनिकल ट्रायल्स के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर क्रांतिकारी बदलाव लाने के उद्देश्य से जीआर व्हाय इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी, बोरावां में "क्लीनिकल ट्रायल्स पद्धतियों, चुनौतियों और वैश्विक नवाचार" विषय पर अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में अमेरिका, ताइवान और भारत के नामी शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला का उद्देश्य फार्मेसी के क्षेत्र में नवीनतम शोध और तकनीकों को साझा करना, क्लीनिकल ट्रायल्स की जटिलताओं को समझना और रोगी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना था। यह कार्यशाला वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद, मप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद एवं परमाणु विज्ञान अनुसंधान बोर्ड के सहयोग से आयोजित की गई, जो फार्मेसी अनुसंधान के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यूएस और ताइवान के विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
कार्यशाला में मुख्य वक्ता डॉ. बिथेनी कारपेंटर, क्लिनिकल फार्मेसी सुपरवाइजर (मरीन हेल्थ मेडिकल सेंटर, कैलिफोर्निया, यूएसए) और सुश्री एलिस, क्रिटिकल केयर फार्मासिस्ट (ताइपे म्युनिसिपल वानफैंग हॉस्पिटल, ताइवान) ने क्लीनिकल ट्रायल्स की नवीनतम तकनीकों, नियामक चुनौतियों और रोगी सुरक्षा को लेकर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि वैश्विक स्वास्थ्य देखभाल क्षेत्र में क्लीनिकल ट्रायल्स एक अहम भूमिका निभाते हैं और इनकी दक्षता को बढ़ाने के लिए नवीनतम तकनीकों, नैतिक मापदंडों और रोगी-हितैषी दृष्टिकोण को अपनाने की आवश्यकता है।
विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति ने बढ़ाया महत्व
कार्यशाला के मुख्य अतिथि डॉ. इंद्रजीत सिंघवी, प्रोवोस्ट (पैसिफिक मेडिकल यूनिवर्सिटी, उदयपुर) और डॉ. नीरज उपमन्यु, प्रो-वाइस चांसलर (सेज यूनिवर्सिटी, भोपाल) रहे। इनके अलावा, विभिन्न फार्मेसी संस्थानों के प्रोफेसर, शोधकर्ता और विशेषज्ञ भी शामिल हुए।
वैश्विक अनुसंधान में बढ़ेगा भारत का योगदान : अरुण यादव
कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में पूर्व केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री एवं संस्थान के चेयरमैन अरुण यादव ने कहा कि यह अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला फार्मेसी के शोधकर्ताओं, प्राध्यापकों और विद्यार्थियों के लिए एक अनूठा मंच साबित होगी। इससे न केवल वैश्विक स्तर पर फार्मेसी अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि विभिन्न देशों के विशेषज्ञों के साथ ज्ञान, तकनीक और अनुसंधान का आदान-प्रदान भी होगा। भारत में फार्मेसी अनुसंधान का क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में वैश्विक विशेषज्ञों के साथ यह संवाद हमारे शोधकर्ताओं को नई प्रेरणा देगा और स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा मिलेगा ।
500 से अधिक शोधकर्ता, 1000 से अधिक जुड़े लाइव
इस कार्यशाला में भारत के विभिन्न राज्यों से आए 500 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जबकि 1,000 से अधिक शोधकर्ता और विद्यार्थी विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मों और यूट्यूब के माध्यम से लाइव जुड़े। संस्थान के प्राचार्य डॉ. सुजीत पिल्लई ने सभी अतिथियों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस कार्यशाला के माध्यम से विशेषज्ञों के अनुभव, क्षेत्र-विशिष्ट चुनौतियों और समाधानों पर चर्चा करने का एक अनूठा अवसर मिला। कार्यशाला के समापन सत्र में सर्वश्रेष्ठ शोधकर्ताओं को सम्मानित किया गया और इस आयोजन को सफल बनाने के लिए डॉ. निखलेश एवं डॉ. प्रभात दास ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। यह अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला न केवल भारत, अमेरिका और ताइवान के बीच शोध और तकनीक के सहयोग को मजबूत करेगी, बल्कि स्वास्थ्य क्षेत्र में नवीनतम खोजों और उपचारों को गति देने में भी मददगार साबित होगी।
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